Saturday, December 31, 2022
मेरे मन में खरसावाँ था
Thursday, October 13, 2022
आशियाना
Wednesday, October 12, 2022
कडुल्या
Friday, October 7, 2022
तुम्हारे साथ
Sunday, September 18, 2022
आदिवासियत की पौध
धीरे-धीरे ढ़हने लगती हैं
वह ईमारतें
जिनमें कोई नहीं रहता
कहीं प्लसतर गिरता है
कहीं छत उधड़ती है
कहीं मुखडोली गिरती है
तो कहीं से पानी रिसता है।
दरार जब दीवारों में पड़ती है
उग आते हैं
पंछियों के छोड़े गए बीज उनमें
और लेने लगते हैं गिरफ्त में
अपनी जड़ों के
उस जर्जर ईमारत को।
ऐसी ही मजबूत-सी दिखने वाली
मगर कमजोर ईमारत की जद में
गिरफ्तार है मेरा समुदाय
और बंद पाता है
खुद को
जहां न कोई खिड़की है
न बाहर को जाने का दरवाजा।
कुछ लोग रंग रहे हैं अपने खून से इसे
और कुछ
लगे हैं दीवारों को दरकाने में
थोड़ा सा सरकाने में
कोशिश कर रहे हैं
कहीं से तो सरकेगी
थोड़ा सा तो दरकेगी
ताकि
उगाया जा सके
रोपा जा सके
एक आदिवासियत का पौधा
जो जिंदा कर सके इस समुदाय को।
मेरा आह्वान है कि
जोर तो लगाओ
यह गिरेगी
भरभराकर गिरेगी
बनो पौध
बढ़ाओ अपनी जड़ें
धंस जाओ एक-एक ईंट में
हिला दो नींव को
उतार दो इसका यह प्लस्तर
उदेड़ दो इसकी छतें
और बढ़ने दो आदिवासियत का यह पौधा
जिसे कुम्हला दिया है
पीढ़ियों की खामोशी ने...
सरदार
18.09.2022
Friday, September 16, 2022
मेरी जंगली पढ़ाई
आदमियत
Sunday, January 30, 2022
महक
Tuesday, January 25, 2022
सरकार, कम्पनी और सभ्य समाज वर्सेज़ आदिवासी
सभ्य समाज के सहयोग से
सरकारें कम्पनियों के लिए
लाल क़ालीन बिछाती हैं
बदले में कम्पनियाँ
सरकारों के लिए सत्ता के गलियारे सजाती हैं।
हम आदिवासी
मुँह ताकते रहते हैं
इंतज़ार में रहते हैं
कि कम्पनियों को सरकार रोकेगी
पर नहीं समझ पाते कि
कम्पनियाँ, सरकारों के लिए सत्ता के गलियारे सजाती हैं।
सरकारों के इशारे पर
सभ्य समाज के कुछ
सभ्य और भद्र जन
आदिवासियों को असभ्य कहते हैं
और दिन रात सभ्य बनाने की जुगत में लगे रहते हैं।
सभ्य बनाना चाहते हैं
क्यूँ कि कम्पनियों ने आदेश दिया है सरकारों को
ज़मीन ख़ाली कराने का,
जंगल ख़ाली कराने का
बिना सभ्य हुए कैसे आदिवासी
ज़मीन छोड़ेंगे
जंगल छोड़ेंगे
सरकारें फ़रमान निकालती हैं
ज़मीनें ख़ाली कराती हैं
कंपनियो को लाती हैं
सभ्यों को अपनी मेहनत का मेहनताना देती हैं
और आदिवासी!
आदिवासी भूल जाते हैं कि,
कम्पनियाँ, सरकारों के लिए सत्ता के गलियारे सजाती हैं।
२६ जनवरी, २०२२ बुद्धवार
