Sunday, January 30, 2022

महक

सुबह नींद खुलते ही
मैनें खिड़की से मां को निहारा
चाय लेकर आती पत्नी को देखा 
आंगन को बुहारती छोटी बहू को देखा 
चूल्हे के आगे बैठकर आग से तपती जीजी को देखा 
और बगल की मेज पर रखे मोबाइल से बेटी को देखने के लिए 
वीडियो कॉल कर दिया

सब एक-दूसरे की जिंदगी में
खुशियां भरते
घर-आंगन में खुशियां बिखेरते
अपने-अपने काम में मशगूल हैं

बेटी ने फोन की स्क्रीन पर 
चिड़िया की तरह चहकते हुए 
ढूंढा़डी बोली को मराठी के लहजे में पूछा 
बड़े पापा निका हो न
मैं जवाब में मुस्कुरा कर कुछ बोलता
उससे पहले ही
चाय का कप रखकर विजय चहक उठी 
और पूछा बेटी से
गुन्नू, जीजी के घर कब आवगी? 

बिटिया बोलती तब तक
बगर भी जाग चुका था 
और स्क्रीन पर चहक रही बहन को देखकर बोला
आजा
हम सब हंस दिए 
जीजी भी चूल्हे के आगे से उठकर
फोन के पास आ गई 
और बोली
बेटी, घरां कद आवगी? 

मां ने मेरे हाथ से 
फोन लेकर, बगर को गोद में उठाकर 
छोटी बहू को दे दिया
और सब चूल्हे की आग के इर्द-गिर्द इकट्ठा हो गईं 
मैं दूर खड़ा
सबके चहकने की आवाजें सुनता रहा
घर की खुशियां मुझे बेफिक्र कर रहीं थी
आधी आबादी का हंसना-मुस्कुराना
आते हुए बसंत का स्वागत करते
सरसों के पीले फूलों के सौंदर्य और महक को
घर के आंगन में 
नीम के पत्तों से छनकर आते
उजाले के साथ उतार रहा था। 


Tuesday, January 25, 2022

सरकार, कम्पनी और सभ्य समाज वर्सेज़ आदिवासी

 सभ्य समाज के सहयोग से 

सरकारें कम्पनियों के लिए 

लाल क़ालीन बिछाती हैं 

बदले में कम्पनियाँ 

सरकारों के लिए सत्ता के गलियारे सजाती हैं।


हम आदिवासी 

मुँह ताकते रहते हैं 

इंतज़ार में रहते हैं 

कि कम्पनियों को सरकार रोकेगी 

पर नहीं समझ पाते कि 

कम्पनियाँ, सरकारों के लिए सत्ता के गलियारे सजाती हैं।


सरकारों के इशारे पर 

सभ्य समाज के कुछ 

सभ्य और भद्र जन 

आदिवासियों को असभ्य कहते हैं 

और दिन रात सभ्य बनाने की जुगत में लगे रहते हैं।


सभ्य बनाना चाहते हैं 

क्यूँ कि कम्पनियों ने आदेश दिया है सरकारों को 

ज़मीन ख़ाली कराने का, 

जंगल ख़ाली कराने का 

बिना सभ्य हुए कैसे आदिवासी 

ज़मीन छोड़ेंगे 

जंगल छोड़ेंगे 


सरकारें फ़रमान निकालती हैं

ज़मीनें ख़ाली कराती हैं 

कंपनियो को लाती हैं

सभ्यों को अपनी मेहनत का मेहनताना देती हैं 

और आदिवासी!

आदिवासी भूल जाते हैं कि,

कम्पनियाँ, सरकारों के लिए सत्ता के गलियारे सजाती हैं।




२६ जनवरी, २०२२ बुद्धवार