Saturday, April 13, 2019
Friday, April 12, 2019
वह जो आने वाला है
वह जो आने वाला है घर में
अपनी किलकारियों को लेकर
सब उसके स्वागत को आतुर हैं
घर पर दादी और मौसी
दिखा रही हैं अपने अनुभवों का कौशल
और बहुत बेचैन है
उसका पिता
कल से जब असहज सा
महसूस किया है संतोष ने
वह बार बार बुला लेता है मुझे
हम दर्द बढ़ने को लेकर
उत्सुक हैं
और यह दर्द बढ़कर जन्म देंगे
एक नई रौशनी को
जो तेज हवा और बरसात से
लड़कर जगमगाएगी
और लाएगी घर में खुशहाली
वह जो आने वाली रौशनी है
वह भी तो उत्सुक होगी
देखने को यह चकाचौंध भरी दुनिया
जो बस चली जा रही है
आ जा ओ नन्हें मुसाफिर
तेरा बड़ा काका, दादा, दादी
और बड़ा दादा, दादी
सब इंतज़ार में हैं
देख यह नई सुबह की
रौशनी
और बढ़ा अपनी किलकारियों से
हर किसी के मन में
खुशियों का कोलाहल
आ देख सब की आंखों
में तेरे हिस्से का
प्यार।
अपनी किलकारियों को लेकर
सब उसके स्वागत को आतुर हैं
घर पर दादी और मौसी
दिखा रही हैं अपने अनुभवों का कौशल
और बहुत बेचैन है
उसका पिता
कल से जब असहज सा
महसूस किया है संतोष ने
वह बार बार बुला लेता है मुझे
हम दर्द बढ़ने को लेकर
उत्सुक हैं
और यह दर्द बढ़कर जन्म देंगे
एक नई रौशनी को
जो तेज हवा और बरसात से
लड़कर जगमगाएगी
और लाएगी घर में खुशहाली
वह जो आने वाली रौशनी है
वह भी तो उत्सुक होगी
देखने को यह चकाचौंध भरी दुनिया
जो बस चली जा रही है
आ जा ओ नन्हें मुसाफिर
तेरा बड़ा काका, दादा, दादी
और बड़ा दादा, दादी
सब इंतज़ार में हैं
देख यह नई सुबह की
रौशनी
और बढ़ा अपनी किलकारियों से
हर किसी के मन में
खुशियों का कोलाहल
आ देख सब की आंखों
में तेरे हिस्से का
प्यार।
सरदार
Thursday, April 11, 2019
गांव के कांकड पर रोडिड़े का पेड़
मेरे गांव के कांकड पर
एक रोहिडे़ का पेड़ अकेला है
बचपन से देखता आ रहा हूं
उसे अकेले ही खडे़
बबूल और नीम के पेडो़ से
अपने अकेलेपन पर बतियाते हुए
उससे कुछ दूरी पर
एक आम का पेड़ भी है
वह भी अकेला है
लेकिन जैसे ही हर पतझड़ में
उस पर बगर लगते हैं
गांव के बच्चे आने लगते हैं
उसका अकेलापन दूर करने के लिए
और बगरों के बीच
आने वाली छोटी-छोटी कैरियों
को ताड़ने लगते हैं
इन्हीं मासूम बच्चों में से कोई
उठा कर ढीम
लगाता है निशाना
तो कोई इंतजार करता है
जेठ में चलने वाले अंधडों का
जिससे कैरी टूटकर गिरे
और अपनी खटास से
रोमांचित करदे बच्चों को
दूर खड़ा रोहिड़ा का पेड़
देखता रहता है यह सब
और सुनता रहता है
अपने खोखले तने में बने
मोखले में से सांय सांय निकलती
झगर को
कुछ फूल जो हवा के आलिंगन से
झड़ गए हैं
उठा ले जाते हैं वह बच्चे
और दे देते हैं अपनी बहन को
बालों में लगाने के लिए
अकेलेपन से आजीज
रोहिड़ा का पेड़
मुस्कुरा देता है
उसके साथ में खिलखिला पड़ते हैं
नीम और बबूल के पेड़
उन पर भी लग आए हैं
बगर और फूल और
जल्द ही लग जाएंगे
पातडे़ और निमोलियां
पातड़ों से बनेंगे कंगन और कुंडल
और निमोलियां बनेंगी बोरला
पकने पर मीठी पीली निमोली को
आम कहकर चूखने का मजा लेते बच्चों
को देखकर
नीम अपनी कडवाहट भूल जाएगा
और बबूल भी पैने नुकीले काँटों को
सीने से लगा लेगा
बहुत खुश होते हैं
गांव के कांकड़ पर खड़े वह
आम, नीम, बबूल और
पलाश के पेड़
बच्चों की खुशियों में वह भी
हैं शामिल
मेरे गांव के कांकड़ का खुशहाल
वह कोना
पूरे गांव की खुशहाली
का है द्दौतक
एक रोहिडे़ का पेड़ अकेला है
बचपन से देखता आ रहा हूं
उसे अकेले ही खडे़
बबूल और नीम के पेडो़ से
अपने अकेलेपन पर बतियाते हुए
उससे कुछ दूरी पर
एक आम का पेड़ भी है
वह भी अकेला है
लेकिन जैसे ही हर पतझड़ में
उस पर बगर लगते हैं
गांव के बच्चे आने लगते हैं
उसका अकेलापन दूर करने के लिए
और बगरों के बीच
आने वाली छोटी-छोटी कैरियों
को ताड़ने लगते हैं
इन्हीं मासूम बच्चों में से कोई
उठा कर ढीम
लगाता है निशाना
तो कोई इंतजार करता है
जेठ में चलने वाले अंधडों का
जिससे कैरी टूटकर गिरे
और अपनी खटास से
रोमांचित करदे बच्चों को
दूर खड़ा रोहिड़ा का पेड़
देखता रहता है यह सब
और सुनता रहता है
अपने खोखले तने में बने
मोखले में से सांय सांय निकलती
झगर को
कुछ फूल जो हवा के आलिंगन से
झड़ गए हैं
उठा ले जाते हैं वह बच्चे
और दे देते हैं अपनी बहन को
बालों में लगाने के लिए
अकेलेपन से आजीज
रोहिड़ा का पेड़
मुस्कुरा देता है
उसके साथ में खिलखिला पड़ते हैं
नीम और बबूल के पेड़
उन पर भी लग आए हैं
बगर और फूल और
जल्द ही लग जाएंगे
पातडे़ और निमोलियां
पातड़ों से बनेंगे कंगन और कुंडल
और निमोलियां बनेंगी बोरला
पकने पर मीठी पीली निमोली को
आम कहकर चूखने का मजा लेते बच्चों
को देखकर
नीम अपनी कडवाहट भूल जाएगा
और बबूल भी पैने नुकीले काँटों को
सीने से लगा लेगा
बहुत खुश होते हैं
गांव के कांकड़ पर खड़े वह
आम, नीम, बबूल और
पलाश के पेड़
बच्चों की खुशियों में वह भी
हैं शामिल
मेरे गांव के कांकड़ का खुशहाल
वह कोना
पूरे गांव की खुशहाली
का है द्दौतक
अहा! यह मेरे
गांव का कांकड़
गांव का कांकड़
Sunday, April 7, 2019
मेरा जोहार रहेगा
मैं पहाड़ के
छलनी होते, रोंद दिये गये
सीने से उड़ती धूल हूं
तुमने उजाड़ दिया मेरा घर
फिर भी ओ मेरी अस्मत के सौदागर
तुमको मेरा जोहार रहेगा।
सीने से उड़ती धूल हूं
तुमने उजाड़ दिया मेरा घर
फिर भी ओ मेरी अस्मत के सौदागर
तुमको मेरा जोहार रहेगा।
मैं उड़ रही हूं
क्योंकि
जिस पत्थर ने मुझे
लगा रखा था अपने सीने से
उसे उपाड़ लिया है तुमने
फिर भी तुमको मेरा
जोहार रहेगा
क्योंकि
जिस पत्थर ने मुझे
लगा रखा था अपने सीने से
उसे उपाड़ लिया है तुमने
फिर भी तुमको मेरा
जोहार रहेगा
तुम अपनी जेबों में भरकर
जंगल से उधार लिये
कागज के टुकड़ों को
मुझे उड़ा रहे हो
और मैं बनकर एक गुबार
कहीं दूर चली जा रही हूँ
अपने घर से
फिर भी तुमको मेरा
जोहार रहेगा
जंगल से उधार लिये
कागज के टुकड़ों को
मुझे उड़ा रहे हो
और मैं बनकर एक गुबार
कहीं दूर चली जा रही हूँ
अपने घर से
फिर भी तुमको मेरा
जोहार रहेगा
तुमको सबको दिखाने के लिए
जोहार बोलते हो
और गले लगकर डूंगर की
पीठ में घुसेड़ कर खंजर
उसे रोज मारते हो
फिर भी तुमको मेरा
जोहार रहेगा
जोहार बोलते हो
और गले लगकर डूंगर की
पीठ में घुसेड़ कर खंजर
उसे रोज मारते हो
फिर भी तुमको मेरा
जोहार रहेगा
तुम डकार गए सारे डूंगर को
आदिवासियत को मारकर ठोकर
और कर दिए टुकड़े टुकड़े
फिर भी क्रेशर के मुंह में
दहाड़ रहे भाटों का
तुमको जोहार रहेगा
आदिवासियत को मारकर ठोकर
और कर दिए टुकड़े टुकड़े
फिर भी क्रेशर के मुंह में
दहाड़ रहे भाटों का
तुमको जोहार रहेगा
तुमको कोई रोके तो
कहते हो
खरीद लिया है तुमने यह डूंगर
पैसों के लिये बिक गए थे
तुम जैसे वह सब
और सारे जज्बात तुम्हारे
फिर उजड़े डूंगर का
तुमको जोहार रहेगा
कहते हो
खरीद लिया है तुमने यह डूंगर
पैसों के लिये बिक गए थे
तुम जैसे वह सब
और सारे जज्बात तुम्हारे
फिर उजड़े डूंगर का
तुमको जोहार रहेगा
हर पल की मौत के आगे
लज्जित से होते हैं सब
जब पान की पीक थूंककर
जोहार बोलते हो तुम तो
तुम थूक कर हम सब पर
आगे को बढ़ जाते हो
फिर भी हम सबका
तुमको जोहार रहेगा
लज्जित से होते हैं सब
जब पान की पीक थूंककर
जोहार बोलते हो तुम तो
तुम थूक कर हम सब पर
आगे को बढ़ जाते हो
फिर भी हम सबका
तुमको जोहार रहेगा
मैं उडूंगी और देखूंगी
वह छोटे छोटे लाश के टुकडे़
देखें कहां ले जाते हो ढोकर
और कर लूंगी उनका आलिंगन
रूंधे गले से रोज लिपटकर
फिर भी तुम जैसों को मेरा
मरकर भी जोहार रहेगा।
वह छोटे छोटे लाश के टुकडे़
देखें कहां ले जाते हो ढोकर
और कर लूंगी उनका आलिंगन
रूंधे गले से रोज लिपटकर
फिर भी तुम जैसों को मेरा
मरकर भी जोहार रहेगा।
सरदार
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