Saturday, December 21, 2024

मैं एक आदिवासी हूँ

मैं एक आदिवासी हूँ 

मैं एक आदिवासी हूँ

मुझे एक आदिवासी के नाम से जाना जाए

सदियों से मैं इस धरा पर

रह रहा हूँ 

जल जंगल जमीन

और यहां के तमाम

पशु-पक्षी पेड़-पौधे मेरे साथी हैं

सिर खुला आसमान

आसमान के तारे-सितारे

नीचे बहती बल खाती नदियां

ऊँचे-नीचे पहाड़ और डूंगर

फसलों से सजे

खेत और खलिहान

यह सब मेरे साथी हैं


मैं एक आदिवासी हूँ

सभ्य-असभ्य के शाब्दिक खेल

मुझे समझ नहीं आते हैं

सियासतों के फैलाये भ्रम के गलियारों में

मैं उलझ कर रह जाता हूँ

कोई मुझे वनवासी कहता है

कोई जनजाति कहता है

लेकिन मैं क्या कहना चाहता हूँ?

यह कोई नहीं सुनना चाहता

सब अपनी सहूलियत के हिसाब से

मुझे समझाना चाहते हैं कि हम तुम्हारे साथी हैं

हम तुम्हें जीना सिखाएँगे

तुम्हारी संस्कृति की रक्षा करेंगे

हम तुम्हें राजनीतिक और आर्थिक संरक्षण देंगे!


और बदले में क्या देंगे?

यह बताते नहीं हैं

कि उन्हें जल जंगल जमीन चाहिये

हमारी छोटी-सी जेब भरकर

खुद जल जंगल जमीन के मालिक बन जाना चाहते हैं

हम आदिवासियों को सत्ता में मामूली सा

दिखावे का हक देकर

हमारे पांवों के तले से जमीन ले लेना चाहते हैं|


और इसमें उनका साथ देते हैं

हमारे ही कुछ लोग

बिक जाते हैं

या बिछ जाते हैं उनके गलियारों में

सत्ता की विष-पोषित रोटियां खाने


और मैं आदिवासी

चुपचाप देखता रहता हूं

जल से भरे बांधों और सूखती हुई नदियों को

ट्रकों में भरकर जाते हुए जंगलों को

अपने पांवों के नीचे से जाती हुई जमीन को

और तब भी

मैं लड़ता आ रहा हूँ

उन सबसे और कुछ अपनों से

ताकि बची रहे जल जंगल और जमीन

बची रहे मेरी पहचान

कि मैं एक आदिवासी हूँ…


22122024

सरदार