Tuesday, October 1, 2019

बारिश रोक रही है

बेशक वह रास्ता रोक रही है
हिम्मत की परीक्षा ले ही रही है
जहां जाना है वहां जाना ही है
फिर डरना क्या और रूकना क्या
जिस धरती पर हमको पहुंचना है
बरसातों से वहां रोज ही लड़ते हैं
सीधे खडे पहाड़ों पर चढ़ते हैं
गहरी खाई और बहती नदियां
गगनचुंबी पेड़ और फूलों का गांव
देख रहे हैं रस्ता अपना
फिर डरना क्या और रूकना क्या
वहां जाना ही है तो बढ़े चलो
हम भी आते हैं बढ़े चलो