कड़ा (कडुल्या) क लिया पांव काट दिया
सुणबा म घणी ही बुरी लाग पण
देखबा म भी घणी बुरी या बात
हर दस पांच दन मं सुणबा कू मिल् आजकल
जीजी कहती रहव् अस्सी भर्या सौ भर्या
कडुल्या है उका
कणकती खंगाली पोंच कांटा बोरला चटकी
अर जाण कांई कांई पहरती वा
अर साथ मं गोदणा
गोरी खाल प काला गोदणा
अर चांदी का गहणा
जीजी का मन को सो सुहावणो रूप...
... यां तांई
काल ही लिख दी छी
फेर काम क आग् लिख ही कोन पायो
आज चनीसो टेम मल्यो तो
एक अखबार देख्यो
खबर छी
जमना न जमानो देख्यो
पण
जमना जीजी न बच सकी
मर गी
...
मारबाळा न कडुल्या की ताणी
पहल्या गळो काट्यो
फेर पग काट दिया
पण फेर भी आपणो करजो कोन चुका पायो
मं सोच रहयो छो कि
वा या न सोच्यो कि म्हारी जीजी भी तो सी ही हैगी
पण कडुल्या का चक्कर मं
सब भूल गो
जीजी न भी अर जामण न भी....
11-13/10/2022
No comments:
Post a Comment