मैं किताबों से दूर भागता था
सब से नहीं
सिलेबस की किताबों से
मैं वही क्यों पढूं
जो उनमें लिखा है.
इम्तिहान की रात को
मेरा मन फैज अहमद फैज़ को पढ़ने का हुआ
तो वह मुझे एनाटॉमी की किताब में मिलेंगे क्या
मुझे इतनी बंदिश वाली
पढ़ाई से दूर जाना ही था.
ऐसी ही एक रात
मैं कोई कविता पढ़ रहा था
मन में नई जिन्दगी के सपने गढ़ रहा था
लेकिन दूसरे दिन
मुझे क्लास में खड़ा कर दिया गया
क्यों कि मैं
ऑरगेनॉन की एफॉरिज्म नहीं सुना पाया था.
ऐसे कौन सजा देता है
मेरे मन में होगा तब पढ़ लूंगा
तुम्हारी दुनिया में अपने महल गढ़ लूंगा
अभी तो मुझे
पत्थलगढ़ी में से
'हिंसक होंगे भले आदमी
बेघर होंगे घास के बीज'
समझने दो ना
या फिर तुम समझा दो.
मैंने मेडिकल और होम्योपैथी की किताबों के बीच
आदिवासी साहित्य को खड़ा कर दिया है
अब आओ तुम
मैं सुनाऊंगा तुम्हें
जंगल के गीत
आदिवासियत से लबरेज जीजी के किस्से-कहानियां
फिर तुम नहीं कर पाओगे मुझे
क्लास में खड़ा
क्योंकि मैं खड़ा हूं
जंगल में
जहां पर तुम जाने से डरते हो
आओ ना
सांय सांय करती हवा को सुनो
पतों से बातें करती डालों को सुनो
नदी से बात करते पहाड़ों को सुनो
मुझे तुम्हारे सिलेबस से नहीं
अपने मन से पढ़ने दो
झरनों से गिरते पानी से
बात करने दो.
28.07.22
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