Monday, May 20, 2019

बचपन की गाड़ी

पुरानी चप्पल को काटने पर
दो अदद पहिए
बन जाते थे
फिर उन पहियों को साथ लाने के लिए
धुरी के रूप में
ढूंढते थे सरकंडो की पेलियां
सपकंडे की धुरी पर
कुएं पर से चुराई जाती थी
पानी के किर्लोस्कर इंजन से
रबड़ की नळकी
जिसके बीच में करके ठेक
फंसा देते थे
एक लंबा सा फैडा़
जिसके दूसरे छोर पर
होती थी चप्पल को काटकर बनाई गई गोल बंगड़ी
और जब तैयार हो जाती थी
हमारी यह गाड़ी
हम सबसे अमीर
सबसे खुश
चलाते थे इतरा कर
कभी-कभी पीछे
जुड़ी होती थी
मिट्टी से बनी ट्रोली
जिसमें होती थी मिट्टी
भरत करने के लिए.

इस गाड़ी के अलावा जब
कभी मिल जाते थे
नरम लोहे
या सिलोर के नरम तार
तो गाड़ी बनाने में पारंगत
किसी साथी से
बनवाते थे
तार की गाड़ी
और बनवाने की मजदूरी
रख लेता था वह
तार का एक हिस्सा
जिसे बेचकर
मतीरे वाले मोटे खटीक से
मतीरा खाया जाता था.

ऐसे ही मौजमस्ती में
बिना पांव में चप्पलों के
निकल जाता था
उंधाळा
कभी कभी जून की
तेज धूप में
दाद जाती थी पगथलियां
और बन जाती थी
छलौड़ी
तो
कभी टूट जाते थे
गेहूं के फांसे
और बबूल के कांटे
जिनको निकालने के एवज में
पड़ते थे चांटे
और खूब सारी डांट.

ऐसे ही निकलती थी
गरमी की छुट्टियां
और हम अगली छुट्टियों के लिए
लगे रहते थे तार कबाड़ने
और पुरानी चप्पलों को
सहेजकर रखने में

अहा! वह प्यारा बचपन
और हमारी तार और
चप्पल से बनी गाड़ी।


सरदार
20.05.2019

Wednesday, May 15, 2019

पेड़ और हम

जब भी तुम्हें जरूरत होती है
मेरे पास आ जाते हो
तुम्हें छाया चाहिए
तुम्हें भोजन चाहिए
तुम्हें पानी चाहिए
तुम्हें दवा चाहिए या
तुम्हें जीवन चाहिए
तुम मेरे पास आ जाते हो

मैं पेड़ हूँ
कभी तुम उगाते हो
कभी खुद ही उग आता हूँ
उगने के लिये
मुझे चाहिए भी क्या
अंगुल भर से भी कम जमीन
एक कतरे से भी कम पानी
फिर जीवन भर
तलाश में पानी की
अपनी जड़ों को गहरा करता जाता हूँ
और भोजन के लिए
अपनी शाखाओं को फैलाता जाता हूँ
जब शाखाओं पर पते लगते हैं
वह मुझे भी
और तुम्हें भी
भोजन देते हैं
जडो़ और पत्तों के बीच में
यह तना
मजबूती से बांधे रखता है
जड़ों को और पत्तों को।

कभी हम भी
ऐसे ही जुड़े रहते थे
एक दूसरे से
एक दूसरे के लिये
लेकिन अब तुम मुझसे दूर जाने लगे हो
तुम्हें रास्तों को सुगम बनाने के लिए
मुझे रास्ते से हटाना पड़ जाता है
तुम्हें अपने घरों में ईमारती लकड़ी के लिए
मुझे काटना, चीरना पड़ जाता है
मैं तुम्हारे रास्ते में बाधा क्यों बन गया हूं
जबकि पहले तो हम संगी साथी थे
तुम एक के बदले
कई पेड़ लगाते थे
बरसाती दिनों में तुम्हारे कंधों पर कुदाल
और हाथों में पौधे हुआ करते थे
मुझे जानवरों से बचाते थे
तेज आंधियों से बचाते ते
फिर यह समय का
कैसा फेर है साथी
ना तुम मुझे चाहते हो
ना खुद को चाहते हो!

फिर से
बरसात का मौसम
आने वाला है
दूर पड़ी कुदाल तुम्हारा इंतजार कर रही है
मेरी जड़ों में बिखरे बीज समेटो
और बिखेर दो इन्हें
दूर दूर तक
आवाज दो हरियल पक्षी को
कबूतर और बकरी को
वह दें तुम्हारा साथ
मेरे बीज फैलाने में।

मैं ही हूँ तुम्हारा असली दोस्त
तुम्हारा असली संरक्षक
तुम मुझे सहेजो
मैं तुम्हें सहेजता हूं
ताकि
हमारी जो पीढ़ियाँ
आने को आतुर हैं
गर्व कर सकें हम पर
और सहेज सकें
एक दूसरे को
एक दूसरे के लिये।

जोहार
सरदार
(मध्य रात्रि, 15 व 16 मई, 2019)

Monday, May 6, 2019

मैं नई कोंपल हूँ बाबा

मैं नई कोंपल हूँ बाबा
अपनी छांव में रहने दो

अभी तो दुनिया देखी भी नहीं है
कुछ रोज तो मुझ को जीने दो

रोज सुबह सो कर उठती हूं तो
सर पर हाथ तुम रहने दो

सूरज की तपती किरणों से
अपनी बाहों में छुपने दो

बरसात का जब मौसम आएगा
रिमझिम बारिश में भीगेंगे

खुशी से मैं चहकूंगी बाबा
तुम खेतों का रूख करना

सर्दी गर्मी बारिश सबमें
बाबा साथ सदा रहना

मेरा जीवन तुम्हारे हाथ में है
मुझसे कभी दूर मत होना



सरदार
6.5.19