आज जबकि सामाजिक ताना बाना बिखरने के कगार पर है तब कुछ लोग हैं जो इस ताने बाने को बनाए रखने के लिए बहुत जद्दोजहद कर रहे हैं
सामाजिक ताने बाने को पूंजी के बढ़ते प्रयोग को बहुत क्षति पहुंचाई है
समाज के आर्थिक विकास ने व आर्थिक रूप से समृद्धता ने बीच की दूरियां और ज्यादा बढ़ाई है
लोगों की जेब में जैसे जैसे धन का इजाफा हुआ है वह अपनी जरूरतों के अलावा इस धन को अन्य मदों पर खर्च करने लगे हैं
सामाजिक समरूपता के लिये दूसरों पर बिना किसी प्रतिफल की उम्मीद के धन खर्च करना बहुत ही कम देखा जाता है
लेकिन इस धन की गैर जरूरी आमद ने लोगों को दुर्व्यसनों की और बहुत बड़ी संख्या में धकेला है
शराब, मादक पदार्थों का सेवन, व अन्य कई तरह के व्यसन ने लोगों को अपने जाल में जकड़ लिया है
इस तरह के व्यसनों का पहले भी सभी तबके के लोग शिकार होते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों या दशक भर से इसने अपनी जद में नवयुवकों को जिनमें बेरोजगार, दैनिक मजदूर, सरकारी नौकरी में शामिल युवा जो सभी तरह के विभागों से होते हैं, बराबर अपना योगदान दे रहे हैं.
और पिछले कुछ सालों में स्त्रियों को भी इसने अपनी जद में ले लिया है
आज व्यसनों को अपने रूतबे से जोड़ कर देखा जाता है
इस बदली हुई मानसिक व सामाजिक स्वीकृति ने परिवारों को बिखेर दिया है
रिश्तों में आपसी समझ और सामंजस्य का अभाव आया है.