तुम दस की बात करते हो
उन्होंने सैकडों मारे हैं
आज तीन सौ की भीड़ है
कल हजारों की संख्या में मारेंगे
सदियों से उनका है यही चलन
जो रास्ते से हटा नहीं
उसे जान तक से मार देते हैं
तुम्हें सोनभद्र ही दिखता है
पूरा छतीसगढ़ पूरा झारखंड
पूरा उड़ीसा पूरा आंध्र प्रदेश
पूरा भारत देश ही मारा है
कश्मीर से लेकर सुदूर दक्षिण
पश्चिम से लेकर पूर्वोत्तर तक
हर रोज मारते आए हैं
फिर आज यह इतना कोहराम क्यों
झूठा यह विलाप क्यों
अभी तुम तक नहीं पहूंची
लपट यह
तब तक चुप्पी साध लो तुम
मरने दो जो भी मरता है
अपना कब क्या जाता है
हमारा प्रदेश भिन्न
बोली भाषा और पहनावा भिन्न
इसीलिए रह गए दूर दूर
नहीं सुनते हमारे कान वह क्रंदन
जब मरता है कोई झारखंड में
जब लूटती है अस्मत छत्तीसगढ़ में
हम चुप रहते हैं उड़ीसा पर
आंखें बंदकर लेते हैं इन हालात पर
फिर सोनभद्र को तो रोना ही था
इन हालातों को तो होना ही था
कहीं गोंड कहीं खड़िया का भेद
कहीं मीणा कहीं मुंडा का भेद
भूमिज खासी गालो आदि भूमिज
निशी कहीं आपातानी का भेद
कहीं दिशा कहीं भूमि का भेद
कभी मिट भी नही सकता है यह
हर जगह पर अपनी सब ही हैं श्रेष्ठ
फिर भी समय की यह दरकार है कि
सब साथ उठें और विरोध करें
प्रतिरोध का जो स्वभाव है
उसको मुखर और बुलंद करें
वरना मिटना तो है ही इक दिन
तब तक तो आत्म-सम्मान के लिए लडें
सरदार
19 व 20 जुलाई, 2019
उन्होंने सैकडों मारे हैं
आज तीन सौ की भीड़ है
कल हजारों की संख्या में मारेंगे
सदियों से उनका है यही चलन
जो रास्ते से हटा नहीं
उसे जान तक से मार देते हैं
तुम्हें सोनभद्र ही दिखता है
पूरा छतीसगढ़ पूरा झारखंड
पूरा उड़ीसा पूरा आंध्र प्रदेश
पूरा भारत देश ही मारा है
कश्मीर से लेकर सुदूर दक्षिण
पश्चिम से लेकर पूर्वोत्तर तक
हर रोज मारते आए हैं
फिर आज यह इतना कोहराम क्यों
झूठा यह विलाप क्यों
अभी तुम तक नहीं पहूंची
लपट यह
तब तक चुप्पी साध लो तुम
मरने दो जो भी मरता है
अपना कब क्या जाता है
हमारा प्रदेश भिन्न
बोली भाषा और पहनावा भिन्न
इसीलिए रह गए दूर दूर
नहीं सुनते हमारे कान वह क्रंदन
जब मरता है कोई झारखंड में
जब लूटती है अस्मत छत्तीसगढ़ में
हम चुप रहते हैं उड़ीसा पर
आंखें बंदकर लेते हैं इन हालात पर
फिर सोनभद्र को तो रोना ही था
इन हालातों को तो होना ही था
कहीं गोंड कहीं खड़िया का भेद
कहीं मीणा कहीं मुंडा का भेद
भूमिज खासी गालो आदि भूमिज
निशी कहीं आपातानी का भेद
कहीं दिशा कहीं भूमि का भेद
कभी मिट भी नही सकता है यह
हर जगह पर अपनी सब ही हैं श्रेष्ठ
फिर भी समय की यह दरकार है कि
सब साथ उठें और विरोध करें
प्रतिरोध का जो स्वभाव है
उसको मुखर और बुलंद करें
वरना मिटना तो है ही इक दिन
तब तक तो आत्म-सम्मान के लिए लडें
सरदार
19 व 20 जुलाई, 2019

