Saturday, August 24, 2019

जंगल सू जे बात चाली छी

जंगल सूं या बात चाली छी
आ पोंहची मैदानां म्
बात सुणी जद् मैदानां न्
दौड् पड्या जंगल मांय्
जार् देख्या जद् जंगल कू तो
लाई लगेडी मली वांह
काई हुयो या जंगल कू जे
उजाड हो गया घर कूंचा
खोद दिया डूंगर सारा
पाड् दिया रोंखडा सारा
जंगल सू जे बात चाली छी
पोंहच गई मैदाना मं

असमंजस म मैदान हुअ्या
कयां बुझाव ई लाई कू
बढ री छ धीर् धीर् जे
मैदानां क मांई कू
आज जंगल तड्कई मैदान
काल लील जावगा समंदरा कू
सूख गई नदियां अर नाळा
मर जावगी मछल्यां ताळाबां की
जंगल सूख्या मर गया जंदावर
कुआ सूखैगा मनख मरैगा
जद् आंख्या खुलैगी मैदानां की

जंगल सू जे बात चाली छी
पोंहच गई मैदानां तक
दोड् पड्या सगळा मनख जंदावर
लड्बा कू लाई लगाबाळा सू
लोग लूगायां बूढा अर बाळक
सब का सब उठ खड़ा हुअ्या
देख तमाशो पीठ फेरगा
जंगल कू आग लगाबाळा सब




सरदार २४.८.१९



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