Friday, March 22, 2019

वह जंगल लूटने आए हैं



वह जंगल लूटने आए हैं
हरे-पीले गहरे रंग केकपड़े पहने
कंधे पर बंदूक सजाए
वह जंगल लूटने आए हैं

आगे आगे बंदूक लिए वह
उनके पीछे
सफेद कपडों में
हमारे द्वारा ही चुने गए नेताजी हैं
और उनके पीछे
सूट बूट में, आंखों काला पर काला चश्मा चढ़ाए
वह लाला हैं, जो नेताजी के मालिक हैं
वह जंगल लूटने आए हैं

जंगल के बीच से
जब वह निकल रहे हैं
खपरैल के नीचे खड़ा वह बच्चा
कातर नजरों से देख रहा है
उन हरे-पीले कपडों से सजे
मशीनी इंसान को
जिसने अपने बेटे की
अच्छी शिक्षा के लिए,
मेडल और पैसे के लिए
उसके बाबा को उठा लिया था रास्ते से
और नक्सली बताकर
जंगल की ओर दौड़ाकर मार दिया था,
वह जंगल लूटने आए हैं।

बाबा के मरने पर
यह सफेद कपड़ों वाले आए थे
मुंह लटकाकर, 
और कह गये थे कि वह मदद करेंगे
किसने मारा है तुम्हारे बाबा को
और बैठकर गाड़ी में
धूल उड़ाते वापस चले गए
महंगी सिगरेट का धुआं उड़ाते
वह जंगल लूटने आए हैं

हरे भरे लंबे ऊंचे सखुआ के पेड़
सब जानते हैं
लेकिन वह भी मजबूर हो गए हैं
किसको बताएं अपने मन की व्यथा
जो इनकी बातें मानते थे
इन्हें समझते और जानते थे, 
कहीं दूर चले गए हैं
या तो मार दिए गए हैं
या डरा दिए गए हैं
लेकिन एक दिन मरना तो होगा ही
वहां से हटना तो होगा ही
क्योंकि
वह जंगल लूटने आए हैं।


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