Wednesday, April 28, 2021

नदी

नदी की तरह बहते रहो

बलखाते इठलाते

किनारों का थामकर दामन


हवा की तरह चलते रहो

बिना रूके बिना थके

सबको गले लगाते हुये


चलने का नाम ही जिंदगी है

रूकना जीवन नहीं हो सकता

बिना किसी ठहराव के


फूलों की तरह मुस्कुराहट बिखेरो

महक बिखेरो सबके लिये

खुशियां हो या बुरा समय...


जोहार 

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