कचर का वारिस
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चारों तरफ पर्दे
नीचे कालीन बिछी है
कालीन पर कुछ औरते हैं
कुछ ने साड़ी
कुछ ने सलवार कमीज
हाथों में
सफेद दस्ताने
पहनी हैं
उनके पास
बांस और बेंत से बनी
चमकदार डलिया में
तरह-तरह का
विभिन्न खुशबूओं वाला
रंग बिरंगा
कचरा भरा है
बहुत साफ-सुथरा
शालीनता से
रखा हुआ कचरा
और उतने सभ्य और शालीन
कचरा बीनने वाले हाथ
तभी
चारों तरफ खामोशी से
बढता हुआ शोरगुल
शोरगुल के साथ में ही
कोतूहल
कैमरों की आंखों से
चमकती बिजली
और कटैक कटैक की
आवाज के साथ
बनती तस्वीरें
वह आगे बढ़ा
शामियाने में
सजा कर
रखे गए कचरे की ओर
और खड़ा हो गया
हाथ बांधकर
कमर के पीछे
ढूंढने के लिए
कचरे से अपना रिश्ता
कैमरों की आंखों में चमक थी
उत्साह था
एक नई तस्वीर थी
साथ में अपने
झुंड के साथ
एक साथ
आगे पीछे
बार-बार
कटैक कटैक करके
बतिया रहे थे
एक नई किस्सागोई
को जन्म दे रहे थे
उसने हिम्मत की
बैठने के लिए
पहले से रखे पीढ़े पर
तशरीफ रखकर
बिना दस्तानों के
नंगे हाथों से
उठा कर
शालीनता से रखे
साफ-सुथरे कचरे से
पॉलीथिन
एक नई
मुहिम चलाई
एकबारी काम आने वाले
प्लास्टिक का उपयोग रोकने की
कचरा
हैरान-सा
परेशान-सा
बाट जोहता
उन नंगे हाथों वाले
के मुंह से
अपनी रिश्तेदारी की
कहानी सुनने को
पर नहीं सुन सका
नहीं जान सका
सुना तो खुद के इस्तेमाल
न की जाने वाली बात
लेकिन कब तक
वह ठगा सा रह गया
अनाथ सा
नहीं मिला
उसे अपना वारिस
कैमरों ने अपना काम जारी रखा
चमकते रहे
बतियाते रहे
फिर चले गए
पीछे-पीछे
और
भीड़ में खो गई
वह सभ्य सी
शालीन सी
कचरा बीनने वाली
बाहर बने कचरा पात्र में
दस्ताने फेंककर
और बन गई भीड़ का हिस्सा
कचरा
इंतज़ार कर रहा था
खुद को वहां से उठाने का
दूसरी जगह पहुंचने का।
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सरदार
12.09.2019
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चारों तरफ पर्दे
नीचे कालीन बिछी है
कालीन पर कुछ औरते हैं
कुछ ने साड़ी
कुछ ने सलवार कमीज
हाथों में
सफेद दस्ताने
पहनी हैं
उनके पास
बांस और बेंत से बनी
चमकदार डलिया में
तरह-तरह का
विभिन्न खुशबूओं वाला
रंग बिरंगा
कचरा भरा है
बहुत साफ-सुथरा
शालीनता से
रखा हुआ कचरा
और उतने सभ्य और शालीन
कचरा बीनने वाले हाथ
तभी
चारों तरफ खामोशी से
बढता हुआ शोरगुल
शोरगुल के साथ में ही
कोतूहल
कैमरों की आंखों से
चमकती बिजली
और कटैक कटैक की
आवाज के साथ
बनती तस्वीरें
वह आगे बढ़ा
शामियाने में
सजा कर
रखे गए कचरे की ओर
और खड़ा हो गया
हाथ बांधकर
कमर के पीछे
ढूंढने के लिए
कचरे से अपना रिश्ता
कैमरों की आंखों में चमक थी
उत्साह था
एक नई तस्वीर थी
साथ में अपने
झुंड के साथ
एक साथ
आगे पीछे
बार-बार
कटैक कटैक करके
बतिया रहे थे
एक नई किस्सागोई
को जन्म दे रहे थे
उसने हिम्मत की
बैठने के लिए
पहले से रखे पीढ़े पर
तशरीफ रखकर
बिना दस्तानों के
नंगे हाथों से
उठा कर
शालीनता से रखे
साफ-सुथरे कचरे से
पॉलीथिन
एक नई
मुहिम चलाई
एकबारी काम आने वाले
प्लास्टिक का उपयोग रोकने की
कचरा
हैरान-सा
परेशान-सा
बाट जोहता
उन नंगे हाथों वाले
के मुंह से
अपनी रिश्तेदारी की
कहानी सुनने को
पर नहीं सुन सका
नहीं जान सका
सुना तो खुद के इस्तेमाल
न की जाने वाली बात
लेकिन कब तक
वह ठगा सा रह गया
अनाथ सा
नहीं मिला
उसे अपना वारिस
कैमरों ने अपना काम जारी रखा
चमकते रहे
बतियाते रहे
फिर चले गए
पीछे-पीछे
और
भीड़ में खो गई
वह सभ्य सी
शालीन सी
कचरा बीनने वाली
बाहर बने कचरा पात्र में
दस्ताने फेंककर
और बन गई भीड़ का हिस्सा
कचरा
इंतज़ार कर रहा था
खुद को वहां से उठाने का
दूसरी जगह पहुंचने का।
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सरदार
12.09.2019
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