जब भी तुम्हें जरूरत होती है
मेरे पास आ जाते हो
तुम्हें छाया चाहिए
तुम्हें भोजन चाहिए
तुम्हें पानी चाहिए
तुम्हें दवा चाहिए या
तुम्हें जीवन चाहिए
तुम मेरे पास आ जाते हो
मैं पेड़ हूँ
कभी तुम उगाते हो
कभी खुद ही उग आता हूँ
उगने के लिये
मुझे चाहिए भी क्या
अंगुल भर से भी कम जमीन
एक कतरे से भी कम पानी
फिर जीवन भर
तलाश में पानी की
अपनी जड़ों को गहरा करता जाता हूँ
और भोजन के लिए
अपनी शाखाओं को फैलाता जाता हूँ
जब शाखाओं पर पते लगते हैं
वह मुझे भी
और तुम्हें भी
भोजन देते हैं
जडो़ और पत्तों के बीच में
यह तना
मजबूती से बांधे रखता है
जड़ों को और पत्तों को।
कभी हम भी
ऐसे ही जुड़े रहते थे
एक दूसरे से
एक दूसरे के लिये
लेकिन अब तुम मुझसे दूर जाने लगे हो
तुम्हें रास्तों को सुगम बनाने के लिए
मुझे रास्ते से हटाना पड़ जाता है
तुम्हें अपने घरों में ईमारती लकड़ी के लिए
मुझे काटना, चीरना पड़ जाता है
मैं तुम्हारे रास्ते में बाधा क्यों बन गया हूं
जबकि पहले तो हम संगी साथी थे
तुम एक के बदले
कई पेड़ लगाते थे
बरसाती दिनों में तुम्हारे कंधों पर कुदाल
और हाथों में पौधे हुआ करते थे
मुझे जानवरों से बचाते थे
तेज आंधियों से बचाते ते
फिर यह समय का
कैसा फेर है साथी
ना तुम मुझे चाहते हो
ना खुद को चाहते हो!
फिर से
बरसात का मौसम
आने वाला है
दूर पड़ी कुदाल तुम्हारा इंतजार कर रही है
मेरी जड़ों में बिखरे बीज समेटो
और बिखेर दो इन्हें
दूर दूर तक
आवाज दो हरियल पक्षी को
कबूतर और बकरी को
वह दें तुम्हारा साथ
मेरे बीज फैलाने में।
मैं ही हूँ तुम्हारा असली दोस्त
तुम्हारा असली संरक्षक
तुम मुझे सहेजो
मैं तुम्हें सहेजता हूं
ताकि
हमारी जो पीढ़ियाँ
आने को आतुर हैं
गर्व कर सकें हम पर
और सहेज सकें
एक दूसरे को
एक दूसरे के लिये।
जोहार
सरदार
(मध्य रात्रि, 15 व 16 मई, 2019)
मेरे पास आ जाते हो
तुम्हें छाया चाहिए
तुम्हें भोजन चाहिए
तुम्हें पानी चाहिए
तुम्हें दवा चाहिए या
तुम्हें जीवन चाहिए
तुम मेरे पास आ जाते हो
मैं पेड़ हूँ
कभी तुम उगाते हो
कभी खुद ही उग आता हूँ
उगने के लिये
मुझे चाहिए भी क्या
अंगुल भर से भी कम जमीन
एक कतरे से भी कम पानी
फिर जीवन भर
तलाश में पानी की
अपनी जड़ों को गहरा करता जाता हूँ
और भोजन के लिए
अपनी शाखाओं को फैलाता जाता हूँ
जब शाखाओं पर पते लगते हैं
वह मुझे भी
और तुम्हें भी
भोजन देते हैं
जडो़ और पत्तों के बीच में
यह तना
मजबूती से बांधे रखता है
जड़ों को और पत्तों को।
कभी हम भी
ऐसे ही जुड़े रहते थे
एक दूसरे से
एक दूसरे के लिये
लेकिन अब तुम मुझसे दूर जाने लगे हो
तुम्हें रास्तों को सुगम बनाने के लिए
मुझे रास्ते से हटाना पड़ जाता है
तुम्हें अपने घरों में ईमारती लकड़ी के लिए
मुझे काटना, चीरना पड़ जाता है
मैं तुम्हारे रास्ते में बाधा क्यों बन गया हूं
जबकि पहले तो हम संगी साथी थे
तुम एक के बदले
कई पेड़ लगाते थे
बरसाती दिनों में तुम्हारे कंधों पर कुदाल
और हाथों में पौधे हुआ करते थे
मुझे जानवरों से बचाते थे
तेज आंधियों से बचाते ते
फिर यह समय का
कैसा फेर है साथी
ना तुम मुझे चाहते हो
ना खुद को चाहते हो!
फिर से
बरसात का मौसम
आने वाला है
दूर पड़ी कुदाल तुम्हारा इंतजार कर रही है
मेरी जड़ों में बिखरे बीज समेटो
और बिखेर दो इन्हें
दूर दूर तक
आवाज दो हरियल पक्षी को
कबूतर और बकरी को
वह दें तुम्हारा साथ
मेरे बीज फैलाने में।
मैं ही हूँ तुम्हारा असली दोस्त
तुम्हारा असली संरक्षक
तुम मुझे सहेजो
मैं तुम्हें सहेजता हूं
ताकि
हमारी जो पीढ़ियाँ
आने को आतुर हैं
गर्व कर सकें हम पर
और सहेज सकें
एक दूसरे को
एक दूसरे के लिये।
जोहार
सरदार
(मध्य रात्रि, 15 व 16 मई, 2019)

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