Monday, May 6, 2019

मैं नई कोंपल हूँ बाबा

मैं नई कोंपल हूँ बाबा
अपनी छांव में रहने दो

अभी तो दुनिया देखी भी नहीं है
कुछ रोज तो मुझ को जीने दो

रोज सुबह सो कर उठती हूं तो
सर पर हाथ तुम रहने दो

सूरज की तपती किरणों से
अपनी बाहों में छुपने दो

बरसात का जब मौसम आएगा
रिमझिम बारिश में भीगेंगे

खुशी से मैं चहकूंगी बाबा
तुम खेतों का रूख करना

सर्दी गर्मी बारिश सबमें
बाबा साथ सदा रहना

मेरा जीवन तुम्हारे हाथ में है
मुझसे कभी दूर मत होना



सरदार
6.5.19

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