वह दौड़ रही है
लगातार दौड़ रही है
दौड़े ही जा रही है
और दौड़ पूरी होने के बाद
लहरा कर हवा में
अपने हाथों को
सारे जहाँ को समेट लेती है
अपने आगोश में
गर्व के साथ
गले में लटकाकर
अखोमिया गमछा
जो उसकी संस्कृति का हिस्सा है
वह भूलती नहीं
अपनों को
वह जीत रही है
सबसे तेज दौड़कर
लेकिन तब भी
आंसू हैं उसकी आंखों में
यह आंसू
जीतने की खुशी के हैं
कि
अपने जैसे लोगों की
गुमनामी के हैं
जिसे पूरा देश
नकार रहा है
और गूगल पर
उसकी जाति ढूंढ रहा है
जब वह दौड़ रही थी
पूरी ताकत से
तभी प्रकृति भी
बरस रही थी
पूरी ताकत से
डूबो देने को
उसका घर आंगन
तरबतर करके पानी से
बेहाल कर देने को
सारा जनजीवन
वह दूर परदेश से
नहीं भूलती
भेजना मदद
अपने लोगों को
और हम उसकी इस
सिर्फ ताली बजाएंगे
क्योंकि वह दौड़ रही है देश के लिए
वह दौड़ रही है
अपनी पहचान के लिए
जिसे सब मिटा देना चाहते हैं
लेकिन उसे दौड़ना है
यह दौड़ उसका नसीब है
जैसे कि उसके पुरखों का नसीब था
पता नहीं कब रूकेगा
यह दौड़ना
जिसे पीछे छोड़ देने को
वह दौड़ रही है
लगातार दौड़ रही है....
(हिमा दास के लिए)
सरदार
19.07.2019
लगातार दौड़ रही है
दौड़े ही जा रही है
और दौड़ पूरी होने के बाद
लहरा कर हवा में
अपने हाथों को
सारे जहाँ को समेट लेती है
अपने आगोश में
गर्व के साथ
गले में लटकाकर
अखोमिया गमछा
जो उसकी संस्कृति का हिस्सा है
वह भूलती नहीं
अपनों को
वह जीत रही है
सबसे तेज दौड़कर
लेकिन तब भी
आंसू हैं उसकी आंखों में
यह आंसू
जीतने की खुशी के हैं
कि
अपने जैसे लोगों की
गुमनामी के हैं
जिसे पूरा देश
नकार रहा है
और गूगल पर
उसकी जाति ढूंढ रहा है
जब वह दौड़ रही थी
पूरी ताकत से
तभी प्रकृति भी
बरस रही थी
पूरी ताकत से
डूबो देने को
उसका घर आंगन
तरबतर करके पानी से
बेहाल कर देने को
सारा जनजीवन
वह दूर परदेश से
नहीं भूलती
भेजना मदद
अपने लोगों को
और हम उसकी इस
सिर्फ ताली बजाएंगे
क्योंकि वह दौड़ रही है देश के लिए
वह दौड़ रही है
अपनी पहचान के लिए
जिसे सब मिटा देना चाहते हैं
लेकिन उसे दौड़ना है
यह दौड़ उसका नसीब है
जैसे कि उसके पुरखों का नसीब था
पता नहीं कब रूकेगा
यह दौड़ना
जिसे पीछे छोड़ देने को
वह दौड़ रही है
लगातार दौड़ रही है....
(हिमा दास के लिए)
सरदार
19.07.2019

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