Thursday, July 18, 2019

वह दौड़ रही है

वह दौड़ रही है
लगातार दौड़ रही है
दौड़े ही जा रही है
और दौड़ पूरी होने के बाद
लहरा कर हवा में
अपने हाथों को
सारे जहाँ को समेट लेती है
अपने आगोश में
गर्व के साथ
गले में लटकाकर
अखोमिया गमछा
जो उसकी संस्कृति का हिस्सा है
वह भूलती नहीं
अपनों को

वह जीत रही है
सबसे तेज दौड़कर
लेकिन तब भी
आंसू हैं उसकी आंखों में
यह आंसू
जीतने की खुशी के हैं
कि
अपने जैसे लोगों की
गुमनामी के हैं
जिसे पूरा देश
नकार रहा है
और गूगल पर
उसकी जाति ढूंढ रहा है

जब वह दौड़ रही थी
पूरी ताकत से
तभी प्रकृति भी
बरस रही थी
पूरी ताकत से
डूबो देने को
उसका घर आंगन
तरबतर करके पानी से
बेहाल कर देने को
सारा जनजीवन
वह दूर परदेश से
नहीं भूलती
भेजना मदद
अपने लोगों को
और हम उसकी इस
सिर्फ ताली बजाएंगे
क्योंकि वह दौड़ रही है देश के लिए
वह दौड़ रही है
अपनी पहचान के लिए
जिसे सब मिटा देना चाहते हैं

लेकिन उसे दौड़ना है
यह दौड़ उसका नसीब है
जैसे कि उसके पुरखों का नसीब था
पता नहीं कब रूकेगा
यह दौड़ना
जिसे पीछे छोड़ देने को
वह दौड़ रही है
लगातार दौड़ रही है....


(हिमा दास के लिए)


सरदार
19.07.2019

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